🪔 विषु कानी के बारे में
मलयाली नववर्ष के अवसर पर कई अनुष्ठान और उत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विषु कानी सबसे प्रमुख है ।
'कानी' शब्द का अर्थ है 'प्रथम दृष्टि'। केरल में नववर्ष की सुबह एक विशेष वेदी स्थापित करने की परंपरा है, जिसे विशु कानी कहा जाता है ।
इस वेदी पर शुभ वस्तुएँ रखी जाती हैं, जिनमें ताजे फल (नारियल, कटहल, आम), फूल, एक दर्पण, सिक्के, एक दीपक, और भगवान श्रीकृष्ण व अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा, आदि सम्मिलित हैं। इसका उद्देश्य है कि परिवार के सदस्य इन वस्तुओं को सुबह सबसे पहले देखें, जिससे आने वाले वर्ष में समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति हो ।
विषु के इस पवित्र दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा को अपने जीवन में आमंत्रित करें !
विषु कानी पर संक्रांति का क्षण — १४ अप्रैल, प्रातः ०९:३९ बजे ।
अन्य पर्व
पोहेला बोइशाख और बिहु
यह दिन नई फसल के आगमन का प्रतीक है । क्षेत्रीय कैलेंडर के अनुसार, भारत के विभिन्न हिस्सों में, इस दिन को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, जैसे पोईला बोईशाख (बंगाली नववर्ष) और बिहू (असमिया नववर्ष)। लोग अच्छी फसल के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं । इस दिन भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की 'कालचक्र' के अधिपति के रूप में पूजा की जाती है । यह अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के लिए उत्तम समय है ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : षोडशोपचार द्वारा श्री कृष्ण की नित्य पूजा (१२ मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
