🪔 वट सावित्री व्रत के बारे में

प्राचीन मान्यतानुसार महाभारत में अज्ञातवास के समय सत्यवान की मृत्यु वट वृक्ष के नीचे हो जाती है तथा वह यमलोक में चले जाते हैं । अपने पति की मृत्यु से क्षुब्ध होकर सावित्री भी उनके पीछे यमराज के पास पहुँच जाती हैं । उनके पतिव्रता धर्म की निष्ठा को देखकर यमराज सत्यवान को पुनः जीवन प्रदान करते हैं ।

दाम्पत्य जीवन की कुशलता के लिए भक्त आज बरगद के वृक्ष की पूजा करते हुए देवी माँ से आशीर्वाद माँगते हैं।

अन्य पर्व

फलहारिणी काली पूजा

आज की ही शुभ तिथि में श्री रामकृष्ण परमहंस ने माँ शारदा का पूजन कर उनके अंदर माँ काली की शक्ति को जागृत किया था । इस पूजन के फल प्रसाद माँ काली को समर्पित किये थे इसलिए इसे फलहारिणी काली पूजा कहते हैं । यह पर्व बंगाल प्रदेश में बड़े ही श्रद्धा और भाव से मनाया जाता है ।

शनि जयंती

भगवान शनि निष्पक्ष न्याय में विश्वास करते हैं तथा अपने भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करते हैं। वे कर्म के अनुसार फल देने वाले देवता हैं, जो मनुष्य को सत्य, संयम और कर्तव्यपथ पर अग्रसर करते हैं।

आज के दिन श्रद्धालु शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए व्रत करते हैं ।शनि मंदिरों में जाकर दर्शन एवं पूजा करते हुए भगवान शनि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : षोडशोपचार द्वारा माँ गायत्री की नित्य पूजा (१२ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की प्रार्थना करें।
  • पितृ तर्पण करें और अपने पूर्वजों की शांति व आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें।
  • जप, कीर्तन, शास्त्र अध्ययन और आत्म-चिंतन में समय बिताएं।
  • सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र दान करें या जरूरतमंदों की मदद करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।