🪔 वरुथिनी एकादशी के बारे में
आज भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार, भगवान वामन की पूजा का दिन है । वरुथिनी अर्थात् कवचयुक्त, यानी जिससे हमारी रक्षा हो । आज भगवान वामन की उपासना करने से भक्त हर प्रकार की विपत्ति से सुरक्षित रहता है । जिस प्रकार भगवान वामन ने तीन पग में ब्रह्मांडीय संतुलन स्थापित किया, उसी प्रकार आप भी अपने जीवन को संतुलित करने के लिए उनकी शरण लें । आज के दिन उनसे प्रार्थना करें, मंत्र जपें और दिव्य नामों का गान करें ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : श्री हरि का द्वादशाक्षर मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भक्ति के साथ एकादशी व्रत का संकल्प लें।
- सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी बोलें।
- फल, दूध, मेवे सहित सात्विक शाकाहारी भोजन लें।
- जप, कीर्तन और भगवान विष्णु के बारे में पढ़ने में समय बिताएं।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- पारंपरिक एकादशी नियमों का पालन करें तो अनाज से बचें।
- क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।
