🪔 उत्पन्ना/उत्पत्ती एकादशी के बारे में

आज देवी एकादशी का जन्मोत्सव मनाया जाता है । एक समय असुर मुरासुर द्वारा संतापित देवता भगवान विष्णु के पास अपनी रक्षा का निवेदन ले कर पहुँचे। श्री विष्णु मुरासुर से सदियों तक संग्राम करने के बीच एक गुफा में कुछ क्षण विश्राम करने रुके, तो मुरासुर ने निद्रालीन भगवान को मारने का प्रयास किया । तभी श्री भगवान के स्वरूप से देवी एकादशी उत्पन्न हुईं, जिन्होंने मुरासुर का वध कर भगवान विष्णु की रक्षा की।

आज श्री विष्णु (श्री हरि) की उपासना कर जीवन में देवी एकादशी की शक्ति का अनुभव कीजिए ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : श्री हरि का यज्ञ (१६ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भक्ति के साथ एकादशी व्रत का संकल्प लें।
  • सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी बोलें।
  • फल, दूध, मेवे सहित सात्विक शाकाहारी भोजन लें।
  • जप, कीर्तन और भगवान विष्णु के बारे में पढ़ने में समय बिताएं।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • पारंपरिक एकादशी नियमों का पालन करें तो अनाज से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।