🪔 प्रदोष के बारे में

सोम अर्थात चंद्र। दक्ष प्रजापति ने चंद्र को भयंकर श्राप दिया जिससे उन्हें क्षय रोग होने लगा तथा उनकी आभा क्षीण होने लगी । तब चंद्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चंद्र को अपने शीर्ष पर जटाओं के मध्य विराजित कर उन्हें श्राप से मुक्त किया।

इस दिन उपासना करने से अनेक बुरे कर्मों से मुक्ति मिलती है तथा ईश्वर का अनुग्रह प्राप्त होता है । क्या आप सांसारिक बंधनों को त्यागकर मुक्ति की ओर अग्रसर होना चाहतें हैं? अपनी आंतरिक-शक्ति के द्वार खोलें। भगवान भोलेनाथ प्रतीक्षा कर रहे हैं ।

🙏 पूजा विधि

विशेष पूजा: चतुर्विंशति उपचार द्वारा भगवान शिव की नित्य पूजा (१९ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भक्ति के साथ प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल साफ करें और प्रदोष काल में भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा करें।
  • पूर्ण भक्ति और एकाग्रता के साथ शिवलिंग पर अभिषेक करें।
  • सौम्य व्यवहार और मीठी सत्य वाणी रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।