🪔 सीता नवमी के बारे में
विदेहराज राजर्षि जनक, अपने राज्य में पड़े घोर अकाल के समाधान के लिए यज्ञ हेतु भूमि को हल से जोत रहे थे । इसी दौरान उन्हें धरती में एक स्वर्ण पात्र मिला । उस पात्र के भीतर एक अत्यंत सुंदर और दिव्य बालिका थी । निःसंतान राजा जनक को यह आभास हुआ कि यह बालिका स्वयं धरती माता का कृपा प्रसाद है, जो उनकी संतान की इच्छा को पूर्ण करने के लिए प्रकट हुईं है । उन्होंने इस बालिका को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम सीता रखा ।
प्रभु श्री राम की शाश्वत अर्धांगिनी, माता सीता को सर्वोच्च योगिनी के रूप में भी सम्मानित किया जाता है । इस परम पवित्र तिथि में माँ सीता, जो भगवान राम की शक्ति स्वरूपा हैं, का आवाहन कर उनकी ऊर्जा को जागृत करें ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : राम तांत्रिक मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
