🪔 श्रावण शिवरात्रि के बारे में

कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है । श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को सामान्यतः 'श्रावण शिवरात्रि' के नाम से जाना जाता है । चूँकि पूरा श्रावण मास भगवान शिव की उपासना को समर्पित होता है, इसलिए यह शिवरात्रि अत्यंत शुभ मानी जाती है।

साधक महादेव की भक्ति में रात्रि-जागरण करते हैं । भगवान शिव से जुड़ें और उनकी अनंत कृपा का अनुभव करें ।

विशेष पर्व

कांवड़ यात्रा का समापन

आज कांवड़ यात्रा का भी समापन होता है । भक्त अपने गृहनगर लौटकर शिवलिंग पर गंगाजल से अभिषेकम् करते हैं ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : चतुर्विंशति उपचार द्वारा भगवान शिव की नित्य पूजा (१९ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
  • संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
  • इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
  • परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
  • लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।

⚠️ क्या न करें

  • भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
  • शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
  • कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।