🪔 शीतला सप्तमी के बारे में

यह पावन दिवस देवी शीतला की आराधना को समर्पित है । इस दिन भक्त उनसे उत्तम स्वास्थ्य, शांति और संरक्षण की प्रार्थना करते हैं ।

शीतला सप्तमी के अगले दिन बासोड़ा पर्व मनाया जाता है । इस दिन घरों में भोजन पकाने के लिए अग्नि नहीं जलाई जाती। अतः अधिकांश परिवार एक दिन पूर्व ही भोजन तैयार करते हैं और शीतला अष्टमी के दिन उसी बासी (पूर्व-तैयार) भोजन का सेवन करते हैं । ऐसा माना जाता है कि माँ शीतला चेचक, खसरा आदि रोगों को नियंत्रित करती हैं, और लोग इन रोगों के प्रकोप से रक्षा एवं आरोग्य की कामना हेतु उनकी पूजा-आराधना करते हैं ।

इस पावन पर्व पर माँ दुर्गा की आराधना कर उनकी संरक्षणात्मक ऊर्जा का आवाहन कीजिए ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान: माँ दुर्गा का देवी कवचम् के साथ अभिषेकम् (१० मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
  • संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
  • इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
  • परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
  • लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।

⚠️ क्या न करें

  • भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
  • शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
  • कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।