🪔 शंकराचार्य जयंती/सूरदास जयंती के बारे में
आज महान भारतीय दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक आदि शंकराचार्य जी की जयंती है । 8वीं शताब्दी में उन्होंने अद्वैत वेदांत (अद्वैतवाद) दर्शन की स्थापना और प्रसार किया । वेदों के महान ज्ञाता आदि शंकराचार्य ने पूरे भारत में वेदाध्ययन के केंद्रों के रूप में चार मठों की स्थापना की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने संघर्षपूर्ण समय में अकेले ही सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने का कार्य किया ।
अन्य पर्व
सूरदास जयंती
आज 15वीं सदी के महान संत, कवि और संगीतकार सूरदास की जयंती भी है । सूरदास भगवान कृष्ण को समर्पित अपनी भक्ति रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं । सूरदास ने अपने अमर ग्रंथ 'सूर सागर' (संगीत का सागर) में एक लाख से अधिक भक्ति गीतों की रचना की, जिनमें से मात्र लगभग 8,000 गीत ही आज उपलब्ध हैं ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : गुरुदेव का वैदिक यज्ञ
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
