🪔 शनि प्रदोष के बारे में
शास्त्रों का मत हैं कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है तथा शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है । भोलेनाथ के आशीर्वाद से हमारे रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं ।
इस दिन अपनी ऊर्जा को पुनः संग्रहित, संगठित एवं संचारित कर भोलेनाथ का आवाहन करें ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : भगवान शिव का दशाक्षर मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भक्ति के साथ प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल साफ करें और प्रदोष काल में भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा करें।
- पूर्ण भक्ति और एकाग्रता के साथ शिवलिंग पर अभिषेक करें।
- सौम्य व्यवहार और मीठी सत्य वाणी रखें।
- अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- क्रोध, गपशप, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।
