🪔 फाल्गुन अमावस्या के बारे में

पितरों को प्रसन्न करने हेतु श्राद्ध कर्म करने के लिए सभी अमावस्या के दिन उपयुक्त होते हैं । इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है । महर्षि वेदव्यास के अनुसार, अमावस्या के दिन ध्यान और उपवास करने से हजारों गायों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है ।

सूर्य ग्रहण

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🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : माँ दुर्गा का विस्तृत यज्ञ (१५ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की प्रार्थना करें।
  • पितृ तर्पण करें और अपने पूर्वजों की शांति व आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें।
  • जप, कीर्तन, शास्त्र अध्ययन और आत्म-चिंतन में समय बिताएं।
  • सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र दान करें या जरूरतमंदों की मदद करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।