🪔 नृसिंह जयंती के बारे में

भक्त शिरोमणि श्री प्रह्लाद ने श्रीहरि की भक्ति करने के लिए अपने पिता असुर हिरण्यकश्यप की अवेहलना की थी । इससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र को मारने का प्रयास किया । आज ही के दिन असुर हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु अपने सबसे उग्र रूप नृसिंह अवतार में प्रकट हुए थे । नृसिंह अर्थात आधा नर और आधा सिंह । श्री हरि ने अपने उस रौद्र अवतार में हिरण्यकश्यप का क्षणभर में ही संघार कर दिया था । भगवान अपने सच्चे और निष्ठावान भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं । इस शुभ तिथि में सृष्टि पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना कर उनकी करुणा एवं कृपा के पात्र बनें ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : विष्णु मंत्र जप

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
  • संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
  • इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
  • परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
  • लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।

⚠️ क्या न करें

  • भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
  • शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
  • कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।