🪔 बैसाखी/मेष सक्रांति के बारे में
बैसाखी रबी की फसल पकने का पर्व है । जब गेहूँ की सुनहरी बालियाँ लहलहाने लगती हैं, तो किसान अपनी मेहनत की सफलता का उत्सव मनाते हैं । इस दिन लोग नए वस्त्र पहनते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और आनंद-उल्लास में झूम उठते हैं। सिख समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 1699 में इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी । सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के कारण इसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है ।
🙏 पूजा विधि
विशेष पूजा: सिद्ध सूर्य मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
