🪔 मकर संक्रांति/पोंगल के बारे में

इस शुभ दिन भक्तजन सूर्यदेव की उपासना करते हैं और अच्छी फसल के लिए उत्सव मनाते हैं। आज पवित्र नदियों में स्नान कर, देवी-देवताओं को नैवेद्य (प्रसाद) अर्पित किया जाता है। यह समय दान-दक्षिणा और पितृ तर्पण (श्राद्ध) के लिए भी श्रेष्ठ है।

भीष्म पितामह ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में बाणों की शय्या पर लेटे हुए इसी शुभ दिन देह त्याग का संकल्प लिया था। उन्होंने 58 दिनों तक प्रतीक्षा की और इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए उनकी कृपा और दर्शन प्राप्त किए। श्रीकृष्ण के आशीर्वाद और उत्तरायण के शुभ समय में, भीष्म पितामह ने देह त्याग कर मोक्ष को प्राप्त किया।

सूर्य के सापेक्ष पृथ्वी की गति की वजह से यह समय ईश्वर की साधना और भक्ति के लिए अत्यंत अनुकूल है। आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने और ब्रह्मांडीय शक्तियों को आत्मसात करने के लिए यह समय उत्तम है।

अन्य पर्व

षट्तिला एकादशी

षट्तिला शब्द 'षट्' (छह) और 'तिल' से बना है । इस शुभ दिन भक्तगण भगवान विष्णु की छह विभिन्न प्रकार से तिल के द्वारा पूजा करते हैं, जिससे साधक को भौतिक समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है । आज सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि का आवाहन कीजिए। वे अपने सच्चे भक्त की पुकार अवश्य सुनते हैं ।

🙏 पूजा विधि

विशेष पूजा: सूर्य मंत्र की २१-दिवसीय साधना

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
  • संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
  • इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
  • परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
  • लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।

⚠️ क्या न करें

  • भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
  • शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
  • कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।