🪔 महाशिवरात्रि के बारे में
पवित्र ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष के १४वें दिन (चतुर्दशी) को आने वाली शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से भगवान शिव अत्यधिक प्रसन्न होते हैं । यह तथ्य स्वयं भगवान शिव ने अपनी अर्धांगिनी माँ पार्वती को बताया था । इसी दिन भगवान शिव और माँ पार्वती का विवाह भी हुआ था । भक्तजन प्रार्थना, उपवास और ध्यान के माध्यम से भगवान शिव का स्मरण शिवरात्रि का उत्सव मनाते हैं । भगवान शिव की उपासना कर आत्म-प्रेम, सत्य, अहिंसा, दान, क्षमा जैसे गुणों को अपने भीतर विकसित करें ।
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - फरवरी १५, २०२६ को ०५:०४ पी एम बजे
अन्य पर्व
अंतिम शाही स्नान
आज माघ मेले का अंतिम शाही स्नान है । महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने से आत्म- शुद्धीकरण होता है और जीवन में नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : प्रदोष काल में षोडशोपचार के साथ भगवान शिव की मध्यम पूजा (१२ मिनट) और उसके उपरांत श्री रुद्रम के साथ भगवान शिव का अभिषेकम्।
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
