🪔 माघ पूर्णिमा/ललिता आविर्भाव दिनम के बारे में
माघ पूर्णिमा को किया गया स्नान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने से मन, वचन और कर्म की अशुद्धियाँ दूर होती हैं तथा साधक को आध्यात्मिक पवित्रता और ईश्वरीय की कृपा प्राप्त होती है।
विशेष पर्व
ललिता आविर्भाव दिनम
आज माँ ललिता महा त्रिपुरसुंदरी का प्राकट्य दिवस है । इसी दिन माँ ललिता देवताओं की कठिन तपस्या के पश्चात असुर भंडासुर के संहार के लिए हवन कुंड की पवित्र अग्नि से प्रकट हुई थीं । 'चिदग्नि-कुण्ड-सम्भूता' का अर्थ है, देवी हमारी चेतना की अग्नि से उत्पन्न हुई हैं । माँ ललिता वह सर्वोच्च चेतना हैं जो हमारे जीवन से समस्याओं के अंधकार को हरकर अज्ञानता को समाप्त करती हैं ।
इस पवित्र पूर्णिमा पर माँ ललिता का आवाहन करें । उनकी भक्ति में लीन होकर अपनी साधना की अग्नि को प्रज्वलित करें और उनके दिव्य आशीर्वाद का अनुभव करें ।
🙏 पूजा विधि
विशेष पूजा: सवितुर गायत्री मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की सरल पूजा करें।
- जप, ध्यान और छोटे स्तोत्र/पाठ करें।
- दिन को सात्विक और शांत रखें; आत्म-चिंतन और कृतज्ञता का अभ्यास करें।
- संभव हो तो दान करें (भोजन, दूध, फल) या किसी जरूरतमंद की मदद करें।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- क्रोध, गपशप, आलोचना और कठोर वाणी से बचें।
- भारी/तैलीय भोजन और अत्यधिक नींद से बचें; दिन को सरल और सात्विक रखें।
