🪔 माघ बिहू के बारे में

माघ बिहू पर्व असम में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है । इस दिन फसल कटाई के समापन को मनाने के लिए सामुदायिक भोज और उत्सव का आयोजन किया जाता है ।

माघ बिहू से एक दिन पहले उरुका मनाया जाता है, जिसमें बाँस और पत्तों से अस्थायी झोपड़ियाँ (मेजी) बनाई जाती हैं। उरुका की रात को लोग इन मेजी में भोजन बना कर सामुदायिक भोज करते हैं । अगले दिन सुबह मेजी को जलाया जाता है और भूमि की उर्वरता में वृद्धि करने के लिए उसकी राख को खेतों में बिखेरा जाता है ।

माघ बिहू का यह पर्व अग्निदेव को समर्पित है । इस शुभ अवसर पर अग्निदेव के सबसे तेजस्वी स्वरूप के रूप में भगवान सूर्यनारायण का आवाहन करें और अपने जीवन में ऊर्जा का अनुभव करें ।

🙏 पूजा विधि

विशेष पूजा: सिद्ध सूर्य मंत्र जप

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
  • संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
  • इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
  • परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
  • लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।

⚠️ क्या न करें

  • भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
  • शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
  • कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।