🪔 कृष्ण जन्माष्टमी और काली जयंती के बारे में
भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार श्रीकृष्ण का आज के दिन रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय जन्म हुआ था । आज से कृष्ण जन्मोत्सव आरंभ हो गया है, जिसमें भक्तजन दिनभर व्रत रखते हैं और रातभर जागरण कर उत्सव मनाते हैं । सनातन धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। झूले में बालगोपाल श्री कृष्ण की प्रतिमा को झुलाया जाता हैं और अभिषेकम् के बाद विशेष पूजा की जाती है ।
निशिता पूजा का समय – ४ सितंबर, ११:५५ PM से ५ सितंबर, १२:४२ AM तक ।
अवधि — ०० घंटे ४७ मिनट ।
अन्य पर्व
काली जयंती
आज माँ दुर्गा के एक स्वरूप माँ काली का प्राकट्योत्सव भी मनाया जाता है । यह एक विशेष पर्व है । आज का दिन माता दुर्गा के इस रूप की साधना आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ है।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : रात्रि १२:०० बजे भगवान कृष्ण का सहस्रनाम अभिषेकम् (३० मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
