🪔 कामिका एकादशी के बारे में
इस एकादशी को पवित्र एकादशी भी कहते हैं तथा आज के दिन जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा एवं भाव से देवकीनंदन भगवान श्री कृष्ण की उपासना करता है, वह निश्चित ही संसार रुपी बंधन से मुक्त हो उनकी परम भक्ति को प्राप्त होता है । शास्त्रों में इस पवित्र एकादशी का व्रत अति महत्वपूर्ण बतलाया गया है । महाभारत में धर्मराज युद्धिष्ठिर को भगवान योगेश्वर श्री कृष्ण जी ने समस्त बंधनों से मुक्ति हेतु इस एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया था ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : कृष्ण गायत्री मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भक्ति के साथ एकादशी व्रत का संकल्प लें।
- सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी बोलें।
- फल, दूध, मेवे सहित सात्विक शाकाहारी भोजन लें।
- जप, कीर्तन और भगवान विष्णु के बारे में पढ़ने में समय बिताएं।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- पारंपरिक एकादशी नियमों का पालन करें तो अनाज से बचें।
- क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।
