🪔 काल भैरव जयंती के बारे में

भगवान शिव के रुद्र अवतार, जो संहारकर्ता, अधर्म के दंडक, एवं काल के रक्षक हैं, काल भैरव का प्राकट्य इसी दिन हुआ था ।

देवों और असुरों के मध्य युद्ध में राक्षसों का विनाश करने हेतु उद्भावित, भगवान शिव के यह उग्र स्वरूप भक्त के समस्त भयों, लोभ और वासना का अंत करते हैं ।

क्या आप एक पावन शुद्ध मन की अभिलाषा रखते हैं? तो आइए, भैरव बाबा को अपने जीवन में आमंत्रित कीजिए, तथा अपनी सभी व्यथा और अवगुणों को धराशायी होते हुए देखिए ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : भगवान शिव का दशाक्षर मंत्र जप

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
  • संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
  • इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
  • परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
  • लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।

⚠️ क्या न करें

  • भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
  • शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
  • कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।