🪔 ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के बारे में

सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु को 'ज्येष्ठ श्रेष्ठ प्रजापति' कहा गया है, जो सर्वोच्च और सर्वश्रेष्ठ हैं । यह पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु या माँ के किसी भी स्वरूप का आवाहन करने के लिए सबसे उपयुक्त है । आज के दिन भगवान श्री हरि और माँ के किसी भी रूप का आवाहन करें, और अपनी आत्मा के अंधकार को दूर कर अपने भीतर की प्रकाशमय ऊर्जा का अनुभव करें ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : षोडशोपचार द्वारा श्री हरि की नित्य पूजा (१२ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की सरल पूजा करें।
  • जप, ध्यान और छोटे स्तोत्र/पाठ करें।
  • दिन को सात्विक और शांत रखें; आत्म-चिंतन और कृतज्ञता का अभ्यास करें।
  • संभव हो तो दान करें (भोजन, दूध, फल) या किसी जरूरतमंद की मदद करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना और कठोर वाणी से बचें।
  • भारी/तैलीय भोजन और अत्यधिक नींद से बचें; दिन को सरल और सात्विक रखें।