🪔 होलिका दहन/ वसंत पूर्णिमा के बारे में
भक्त प्रह्लाद भगवान श्री हरि के परम भक्त थे । उनकी भक्ति से क्रोधित होकर उनके पिता हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अग्नि में बैठाकर मार डाले। अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त होलिका, प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई । भक्त प्रह्लाद, पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ श्री हरि का नाम जपते रहे । श्री हरि की कृपा से प्रह्लाद सकुशल रहे, जबकि होलिका स्वयं अग्नि में जलकर भस्म हो गई । यह पावन दिन अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है और श्री हरि की साधना आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है ।
अन्य पर्व
वसंत पूर्णिमा
रंगों से होली खेलने के पर्व रंगोत्सव का आरंभ भगवान श्री कृष्ण के युग से हुआ था । भगवान कृष्ण ने ही राधा रानी और गोपियों के साथ होली खेलना आरंभ किया था । वसंत पूर्णिमा का पर्व होली के साथ ही आता है।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : श्री हरि का द्वादशाक्षर मंत्र जप
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की सरल पूजा करें।
- जप, ध्यान और छोटे स्तोत्र/पाठ करें।
- दिन को सात्विक और शांत रखें; आत्म-चिंतन और कृतज्ञता का अभ्यास करें।
- संभव हो तो दान करें (भोजन, दूध, फल) या किसी जरूरतमंद की मदद करें।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- क्रोध, गपशप, आलोचना और कठोर वाणी से बचें।
- भारी/तैलीय भोजन और अत्यधिक नींद से बचें; दिन को सरल और सात्विक रखें।
