🪔 हरियाली तीज के बारे में
सती रूप में स्वयं को अग्नि को समर्पित करने के पश्चात, जगत्माता ने माँ पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया । उन्होंने भगवान शिव को पुनः पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की । यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। माँ पार्वती के कठोर तप के फलस्वरूप भगवान शिव ने उन्हें पुनः अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया ।
हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में इस दिन युवतियाँ और स्त्रियाँ माँ पार्वती की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं ।
माँ पार्वती के शाश्वत संगी भगवान शिव की पूजा करें और दिव्य प्रेम का अनुभव कर उनकी कृपा प्राप्त करें ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : षोडशोपचार द्वारा भगवान शिव की नित्य पूजा (१२ मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
