🪔 हरतालिका तीज के बारे में
माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी । प्रतिदिन केवल तीन बिल्व पत्तों और अंततः केवल वायु पर जीवित रहकर, उन्होंने कई वर्षों तक तपस्या की, जब तक कि परम योगी का तपस्वी हृदय उनकी अटल भक्ति से द्रवित नहीं हो गया । इस दिन युवतियाँ और महिलाएँ भगवान शिव और माँ पार्वती के दिव्य मिलन की आराधना करती हैं । गीत, नृत्य, व्रत और कथाओं आदि के माध्यम से इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।
हरतालिका पूजा मुहूर्त — सुबह 06:05 बजे से 07:06 बजे तक (14 सितंबर)
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : चतुर्विंशति उपचार द्वारा भगवान शिव की नित्य पूजा (१९ मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
