🪔 गुरु प्रदोष के बारे में

प्रदोष का अर्थ है एक नया आरंभ । यह उन विचारों को त्यागने का उचित समय है जो आपके लिए हितकर नहीं हैं । भगवान शिव की प्रबल उपस्थिति से सुशोभित यह दिन आपको एक नई शुरुआत के लिए आमंत्रित करता है । महादेव और माँ पार्वती के गुरु स्वरूप की आराधना कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : चतुर्विंशति उपचार द्वारा भगवान शिव की नित्य पूजा (१९ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भक्ति के साथ प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल साफ करें और प्रदोष काल में भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा करें।
  • पूर्ण भक्ति और एकाग्रता के साथ शिवलिंग पर अभिषेक करें।
  • सौम्य व्यवहार और मीठी सत्य वाणी रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।