🪔 गोवत्स द्वादशी के बारे में

धनतेरस के एक दिन पूर्व मनाए जाने वाले इस पर्व पर गायों और बछड़ों की पूजा की जाती है और उन्हें गेहूँ की भूसी खिलाई जाती है । सनातन धर्म में नंदिनी को दिव्य गाय माना गया है, इसी कारण आज नंदिनी व्रत भी किया जाता है; भक्त इस दिन दुग्ध और गेहूँ से बने पदार्थों का सेवन नहीं करते।

आइए, अपनी बांसुरी की दिव्य धुन से वृंदावन की समस्त गायों और बछड़ों को मंत्रमुग्ध कर अपनी ओर आकर्षित करने वाले मुरलीधर गोपाल की आराधना कीजिए । उन मनमोहन कान्हा को पुकारिए और उनके दैवीय संगीत से अपनी आत्मा को आनंदित कीजिए ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : श्री कृष्ण तांत्रिक मंत्र जप

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भक्ति के साथ एकादशी व्रत का संकल्प लें।
  • सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी बोलें।
  • फल, दूध, मेवे सहित सात्विक शाकाहारी भोजन लें।
  • जप, कीर्तन और भगवान विष्णु के बारे में पढ़ने में समय बिताएं।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • पारंपरिक एकादशी नियमों का पालन करें तो अनाज से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।