🪔 देवशयनी एकादशी के बारे में
देव अर्थात् भगवान, शयनी अर्थात् सोने (विश्राम) से संबंधित । इस दिन भगवान विष्णु ने असुर संख्यायनंद से युद्ध कर वेदों की पुनर्प्राप्ति के बाद चार महीने के लिए योगनिद्रा में प्रवेश किया । भगवान विष्णु अनंत शेषनाग की कुंडली पर क्षीरसागर में विश्राम कर रहे थे । जब भगवान विष्णु विश्राम कर रहे थे, तो उनकी अनुपस्थिति में भगवान शिव ने सृष्टि की देखभाल की ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : श्री हरि का यज्ञ (१६ मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भक्ति के साथ एकादशी व्रत का संकल्प लें।
- सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी बोलें।
- फल, दूध, मेवे सहित सात्विक शाकाहारी भोजन लें।
- जप, कीर्तन और भगवान विष्णु के बारे में पढ़ने में समय बिताएं।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- पारंपरिक एकादशी नियमों का पालन करें तो अनाज से बचें।
- क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।
