🪔 देव उत्थानी एकादशी के बारे में
भगवान विष्णु आज अपनी चातुर्मास्य निद्रा से जागते हैं । यह एक विशिष्ट दिन है क्योंकि आज से शुभ प्रसंगों का प्रारंभ हो जाता है ।आज की एकादशी प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जानी जाती है। आज भक्त द्वारा संपन्न किए कार्यों का निश्चित रूप से परिणाम देखने को मिलता है ।
यह आपके शेष जीवन का सर्वप्रथम दिवस है । भगवान विष्णु की आराधना कर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हों ।
🙏 पूजा विधि
विशेष अनुष्ठान : श्री हरि का पुरुष सूक्तम् अभिषेकम् (७ मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भक्ति के साथ एकादशी व्रत का संकल्प लें।
- सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी बोलें।
- फल, दूध, मेवे सहित सात्विक शाकाहारी भोजन लें।
- जप, कीर्तन और भगवान विष्णु के बारे में पढ़ने में समय बिताएं।
⚠️ क्या न करें
- अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
- पारंपरिक एकादशी नियमों का पालन करें तो अनाज से बचें।
- क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।
