🪔 देव दीपावली/ कार्तिक पूर्णिमा के बारे में

इस दिन, असुर त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की विजय, तथा भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के निमित्त ज्योतिर्लिंग (अग्नि के अनंत स्तंभ) के रूप में प्राकट्य के आनंदोत्सव में पवित्र गंगा नदी के सभी घाटों पर असंख्य मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। अपने जीवन के समस्त असुरों को पराजित कीजिए।

त्रिपुरारी पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने वाला यह दिवस, असुर त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की विजय का स्मरणोत्सव है । आज, युद्ध के देवता और भगवान शिव के पुत्र, भगवान कार्तिकेय का भी जन्मोत्सव है।

परमपिता परमेश्वर का आवाहन कर विजयश्री को अपने जीवन में आमंत्रित कीजिए ।

अन्य पर्व

कार्तिगई दीपम

इसे थिरुकार्तिगई भी कहा जाता है । यह तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और श्रीलंका में मनाया जाने वाला एक प्राचीन पर्व है ।

कार्तिगई नक्षत्र प्रारंभ — २४ नवम्बर २०२६, प्रातः ०२:०२ बजे

कार्तिगई नक्षत्र समाप्त — २४ नवम्बर २०२६, रात्रि ११:२५ बजे

तुलसी विवाह समापन

भगवान विष्णु (आंवले के वृक्ष की शाखा के रूप में) और माता वृंदा (तुलसी के पौधे के रूप में) के बीच तीन दिवसीय तुलसी विवाह समारोह आज संपन्न हो गया।

गुरु नानक जयंती

यह सिख धर्म के उपदेशक, गुरु नानक देव की जयंती भी है । तुलसी विवाह समारोह आज संपन्न हो गया।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : भगवान शिव का यज्ञ (१६ मिनट)

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की सरल पूजा करें।
  • जप, ध्यान और छोटे स्तोत्र/पाठ करें।
  • दिन को सात्विक और शांत रखें; आत्म-चिंतन और कृतज्ञता का अभ्यास करें।
  • संभव हो तो दान करें (भोजन, दूध, फल) या किसी जरूरतमंद की मदद करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना और कठोर वाणी से बचें।
  • भारी/तैलीय भोजन और अत्यधिक नींद से बचें; दिन को सरल और सात्विक रखें।