🪔 दीपावली /लक्ष्मी पूजन के बारे में
भगवान राम, भगवान लक्ष्मण, और माँ सीता चौदह वर्ष के वनवास के बाद इसी दिन अयोध्या वापिस आए थे । दीपावली असुर रावण पर भगवान राम की विजयश्री, माता सीता के हरण उपरांत सफल त्राण, और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का अयोध्या नरेश के रूप में राज्याभिषेक के प्रतीक स्वरूप मनाई जाती है। इस अमावस्या की गहन रात्रि में, भक्तगण घरों के चारों ओर दीये जलाते हैं और पटाखे फोड़ते हैं ।
आइए, इस आनंदोत्सव पर भगवान श्रीराम की आराधना करें और अपने हृदय को प्रेम के रंगों की चमक से प्रकाशित कीजिए ।
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: सायं ०६:१७ से ०८:२० तक
अवधि: ०२ घंटे ०२ मिनट
अन्य पर्व
निशिता काल काली पूजा
कार्तिक अमावस्या पर माँ काली की तांत्रिक पूजा की जाती है । माँ की पूजा कर बुरी शक्तियों और नकारात्मकता का नाश करने का आशीर्वाद माँगा जाता है । माँ काली की पूजा अहंकार और क्रोध को दूर करती है, जो आध्यात्मिक विकास और प्रगति में बाधा डालते हैं । यह पूजा मध्यरात्रि से शुरू होती है और पूरे महीने चलती है, और कार्तिक पूर्णिमा के दिन संपन्न होती है ।
काली पूजा निशिता काल: 11:39 PM (8 नवम्बर) से 12:31 AM (9 नवम्बर)
🙏 पूजा विधि
चतुर्विंशति उपचार द्वारा माँ लक्ष्मी की नित्य पूजा (१९ मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
