🪔 भीष्म अष्टमी के बारे में
आज के पावन दिन को देवताओं का दिन भी कहा जाता है । इस दिन माँ गंगा के पुत्र भीष्म पितामह ने देहत्याग किया था । उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में बाणों की शय्या पर लेटे हुए ५८ दिनों तक उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी । उत्तरायण, अर्थात् वह समय जब भगवान सूर्य अपनी उत्तर दिशा की ओर यात्रा प्रारंभ करते हैं, जो शरद ऋतु के समापन एवं वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है । मान्यता है कि इस अवधि में मृत्यु प्राप्त करने वाले व्यक्ति की आत्मा सद्गति को प्राप्त होती है । भीष्म पितामह ने भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति में विष्णु सहस्रनाम का उपदेश युधिष्ठिर को दिया और उसके पश्चात देहत्याग किया था ।
🙏 पूजा विधि
विशेष पूजा: श्री हरि का सहस्रनाम अभिषेकम् (३० मिनट)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
- फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
- आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।
✅ क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा स्थल और घर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई करें।
- संभव हो तो फूलों, दीपकों और सरल रंगोली से सजाएं।
- इस त्योहार से जुड़े देवता की नित्य पूजा, यज्ञ या अभिषेक करें।
- परिवार, मित्रों और जरूरतमंदों को प्रसाद बांटें।
- लोगों और जानवरों के प्रति सम्मानजनक और सौम्य व्यवहार रखें।
⚠️ क्या न करें
- भारी, तैलीय भोजन और अत्यधिक मिठाई से बचें।
- शराब, तेज गाड़ी चलाना और शोरगुल वाले उत्सव से बचें।
- कचरा कम करें; जानवरों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
