🪔 भाद्रपद अमावस्या के बारे में

सभी अमावस्या को पितृ अनुष्ठान करने के लिए शुभ माना जाता है । इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप कर उसका फल पितरों को अर्पित करने से उन्हें शांति मिलती है और देवलोक में उच्च स्थान प्राप्त होता है ।

आज के दिन माँ पार्वती ने पहली बार इंद्राणी (इंद्र की पत्नी) को भाद्रपद अमावस्या व्रत का महत्व बताया था । शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से साहसी और स्वस्थ संतान का आशीर्वाद प्राप्त होता है ।

आज के दिन विवाहित स्त्रियाँ ६४ योगनियों की पूजा करती हैं, जो कि श्री शक्ति के विभिन्न पहलू हैं, और अपनी संतान के कल्याण के लिए माँ दुर्गा से प्रार्थना करती हैं ।

🙏 पूजा विधि

विशेष अनुष्ठान : भगवान शिव का मृत्युंजय मंत्र जप

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  2. अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
  3. अनुशंसित अनुष्ठान को भक्ति भाव से करें।
  4. फूल, फल और धूप अर्पित करें।
  5. इस अवसर के लिए विशिष्ट मंत्रों या प्रार्थनाओं का जप करें।
  6. आरती के साथ समाप्त करें और प्रसाद वितरित करें।

✅ क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की प्रार्थना करें।
  • पितृ तर्पण करें और अपने पूर्वजों की शांति व आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें।
  • जप, कीर्तन, शास्त्र अध्ययन और आत्म-चिंतन में समय बिताएं।
  • सौम्य व्यवहार, क्षमा और मीठी सत्य वाणी रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र दान करें या जरूरतमंदों की मदद करें।

⚠️ क्या न करें

  • अंडे, मांसाहार और शराब से बचें।
  • क्रोध, गपशप, आलोचना, झूठ और अन्य नकारात्मक व्यवहार से बचें।